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ईद-उल-जुहा पर कुर्बानी के लिए बकरों की कीमतों में इस बार और इजाफा हुआ है।

ईद-उल-जुहा पर कुर्बानी के लिए बकरों की कीमतों में इस बार और इजाफा हुआ है। बकरीद पर कुर्बानी का सबसे ज्यादा महत्व है। बकरों, ऊंट, दुब्बा आदि की कुर्बानी दी जाती है। बकरा जितना ज्यादा खूबसूरत होता है, उसकी उतनी ज्यादा कीमत होती है।

तोता परी बकरे कीमत सबसे ज्यादा


राजस्थान का तोता परी, बरबरा, देसी बकरा होता है। इसमें तोता परी बकरा काफी खूबसूरत होने के साथ महंगा होता है। कुर्बानी के लिए बकरों में खूबसूरती के साथ कई चीजों का ध्यान रखा जाता है, जिसमें काला-सफेद बकरा, आंखों में कालापन होना चाहिए।


दो दांत का बकरा होना जरूरी


कुर्बानी के बकरा दो दांत का होना चाहिए, जिनके दांत नहीं निकले होते हैं, वह कुर्बानी के लिए उपयुक्त नहीं होते, चार दांत का बकरा भी कुर्बानी के लिए लिया जाता है लेकिन छह दांत के बकरे को बूढ़ा माना जाता है। बाजारों में कुर्बानी के बकरों को अच्छी तरह से सजाया भी जा रहा है।
बकरों की कीमतों में इजाफा


नई बस्ती पाय चौकी निवासी राशिद खान का कहना है कि बकरों की कीमत में इस बार भी इजाफा हुआ है। पिछले लॉकडाउन के समय बकरों की कीमत कम थी और कुर्बानी भी कम हुई थी, लेकिन इस बार बकरों की कीमत और ज्यादा बढ़ गई है। कुर्बानी का बकरा यूं तो दस हजार में मिल जाता है लेकिन दो दिन से बकरों की कीमत में इजाफा हुआ है। बीस किलो वजन का बकरा 21 हजार में बेचा जा रहा है, मोल-भाव करने पर इसकी कीमत एक- दो हजार रुपये कम हो जाती है।

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